शहीद के प्रति

शहीद के प्रति

वह सपूत है माँ तेरा ही
जिसको हर जन याद रखे है।
दिखता है वह हर आँसू में
जिसे पलक में तू रक्खे है।

मत गिरने दे इन आँसू को
वरना हम सब रो बैठेंगे।
तेरी हिम्मत के बल पर ही
हर वीर कहानी लिक्खेंगे।

हर सपूत है माँ तेरा ही
सरहद पर जो डटा हुआ है।
लड़ते लड़ते वह दुश्मन से
हँसते हँसते शहीद हुआ है।

वह देखो वह शूरवीर भी
खड़ा हुआ है खूं से लथपथ।
तेरा बेटा भी था जैसे
सीना ताने वीरों के पथ।

कहता है हिम्मत दो मुझको
कुछ देर अभी माँ जीने दो।
सर ये तुम्हारा हे माता
कुछ ऊँचा ऊँचा करने दो।

सजा रहा हूँ वह इक सपना
जो तेरे बेटे जैसा है।
पुष्प प्राण के अर्पित करने
उससे ही हमने सीखा है।

असीस तुम्हारा ही पाकर
हम बढ़े चले हैं रणपथ पर।
वीरों का सा कुछ देर अभी
कुछ कदम बढ़ाने दो पथ पर।

कहता हूँ मैं माँ ये तुमसे
तुम और मुझे कुछ जीने दो।
मुझको तेरे बेटे जैसा
बन जाने की कुछ हिम्मत दो।

कुछ देर जरा माँ मत रोना
कुछ कर्म मुझे भी करने दो।
तेरे बेटे जैसा मुझको
तेरे दर पर तो आने दो।

पुष्प चढ़ाने मेरे शव पर
नहीं चाहता हर इक आवे।
पर माँ तुझसे ये विनती है
‘बेटा’कह तू गले लगावे।

मान बढ़ेगा तब आँसू का
जिसे पलक में तू रक्खे है।
मुझे मिलेगी तेरी गोदी
रत्न स्वर्ग के जहाँ रखे हैं।
——- भूपेन्द्र कुमार दवे

00000

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/08/2016

Leave a Reply