झूठे वादे – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

ना करने थे वो वादे, ना देनी थी ये यादें।
जिनसे जुडी है तेरी-मेरी मुलाकातें।
जाने क्यों मुझको छोड़ गया तू,
जैसे गगन को टूटता तारा ।

भूल ना चाहू मैं, भूल ना पाऊं मैं,
याद जब आये तू, भीग सा जाऊं मैं,
सूखे पत्तों की तरह बिखर सा जाऊं मैं।

तन्हा जब भी होता हूूँ, अक्सर मैं रोता हूूँ.
तेरे ख्यालों में उस पल डूबा रहता हूूँ,
पाकर मैं तुझको हर पल खोता हूूँ ।

अब जीना नहीं मुझको, ना रहना इस जहान,
अब जाना हैं मुझको, एक ऐसे जहान में,
जहां होते ना ये इरादे, ना होते झूठे वादे।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/08/2016
  2. C.M. Sharma babucm 12/08/2016

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