महँगाई –दोहा -चौपाई

महँगाई
दोहा औऱ चौपाई

दोहा —

हाथ जोड़ विनती करूँ
करो कृपा महराज !!
आज इस महँगाई में
राखो मेरी लाज !!

चौपाई—

जब जब बढ़न लगे महँगाई
तब तब बढ़त जात दुखदायी

छीनत जात मुख का निवाला
दिन दिन होत दाल में काला

आसमान से आफत आई
दशा देखि नहिं जात भुलाई

दीन हीन नहिं एक आधारा
लुटत जात सब पारी पारा

मुट्ठीभर आफत के दाता
मत रक्खो सब इनसे नाता

देखि न जात विकट महँगाई
त्राहि माम सब करत चिहाई

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डॉ सी एल सिंह