खुदा जाने क्या होगा – शायरी

किसी के लफ्ज़ सुनने को, ये दिल बेताब है इतना;
जितना तुम्हें मयखाने जाने का शौक क्या होगा;
एक बार देखा था उसे, तो महीना फलक पर गुज़ारा था;
अब मुलाकात हो गयी तो, खुदा जाने क्या होगा।

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