“मैं”…..शीतलेश थुल

मैं तुझसे आज इस कदर रूठा हूँ।
आँखे बंद कर हकीकत से मुंह मोड़ बैठा हूँ।
तू आ जाये वापस मुझे मनाने।
खुशिया लाये तू मुझे मनाने।
गमो से रिश्ता जोड़ बैठा हूँ।
एक हल्की सी दस्तक भी चूक ना जाये कानो से मेरे ,
मैं दरवाजे से कान सटाये बैठा हूँ।
हर आहट पे लगे के जैसे तेरा ही दीदार हो ,
अपने घर तक का सारा रास्ता जाम किये बैठा हूँ।
लोग कहते है मुझे पागल हो गया है “शीतलेश” तू ,
उन्हें कौन समझाये के मैं “कवि” बना बैठा हूँ।
शीतलेश थुल।

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 11/08/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/08/2016
  3. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 11/08/2016
  4. babucm babucm 11/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 11/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016
  6. Kajalsoni 11/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/08/2016

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