जाने कैसा शहर

— बातों में तल्खियॉ देखी
दिलों में बेचैनियॉ देखी

जिस्म तो पास पास है
मगर रिश्तों मे दूरिया देखि

उूबे और थके हुये लोग दिखे
चहरों पे उबासियॉ देखी

मुरझाये हुया से फूल दिखे
डरी हुयी तितलियॉ देखी

जाने कैसा शहर है ये ?
हर जगह बेचैनयॉ देखी

जुबा पे तोह तारीफे ही थी
मगर दिलो में रंजिशे ही देखि

बड़ी बेताबियों से भरा इंसान दिखा
तमनाओं की अजब सी कहानी देखि

मैंने इस शहर में गुज़रते हर लम्हो को
किसी न किसी के खून में सना ही देखा

कही आबरू को छलनी देखा …!!
कही जवानी रुस्वा हुई नज़र आयी

मेरे मालिक , ऐ मेरे खुदा ,
में कैसे कहूँ न चहते हुऐ भी
मैंने यहाँ क्या क्या देखा

6 Comments

  1. mani mani 11/08/2016
    • tamanna tamanna 11/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/08/2016
  3. babucm babucm 11/08/2016
  4. Kajalsoni 11/08/2016

Leave a Reply