आखिर क्यों? -रामबली गुप्ता

अतुकांत

वो समुद्रतट की
चांदनी रातें
सुहानी बातें
रजनी का रजनीकर के
स्नेहिल ज्योत्स्ना में
नहाना
भीगना।
स्नेह-सिक्त पुलकित यामिनी के
मौन अधरों का चुम्बन,
आलिंगन
रति-परिणय, आहा!
हृदयों में
उमड़ते
लहराते
गहरे प्रेमसागर का
विश्वास
और
गंभीर जलधि की
उपेक्षा
पर आज
वो दृश्य नही
प्रेमसागर नही
सिर्फ अश्रुधार
वही रजनी
रजनीकर
निःशब्दता
किन्तु
सर्प की भाँति डंसता हुआ
हृदय-शूल-सा
 कुरेदता
प्रिये! क्यों?
आखिर क्यों?

रचना-रामबली गुप्ता
     

7 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 11/08/2016
  2. mani mani 11/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/08/2016
  5. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 11/08/2016

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