ये कैसी आजादी है? -पियुष राज

ये कैसी आजादी है

मिल गई आजादी हमको
पर ये कैसी आजादी है
चारों तरफ है भ्रष्टाचार
हर जगह महंगाई है

आज भी आजाद नहीं हैं
हमारे देश की नारियाँ
जन्म लेते ही मार देते है
अगर होती है बेटियॉ
हो रहा है पतन समाज का
बन रहे सब हैवान है
सुरक्षित नहीं है बेटियॉ
बढ़ रहे शैतान है
फिर ये कैसी आजादी है

नेता जी के खेल निराले
चुनाव से पहले घर पधारे
जीतने के लिए
पैर तक झुक जाते है
जीतने के बाद
सारे वादे भूल जाते है
लूटते है देश को
करके हजारों घोटाले
जनता रहती है भूखे-नंगे
वे आराम फरमाते हैं
आज भी अनपढ़ हैं लोग
आज भी गरीबी है
फिर ये कैसी आजादी है

भूल गये हैं शायद हम
उन बलिदानो को
भूल गये है शायद हम
उन वीर महानो को
लहु बहा दी जिसने
देश आजाद कराने को
आज भी शहीद हो रहे सैनिक
अपना देश बचाने को
बढ़ गया है आतंकवाद
नहीं रही इंशानियत है
जाति-धर्म पर लड़ रहे सब
फिर ये कैसी आजादी है |

पियुष राज ,दुधानी , दुमका |Like my Facebook page

3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 11/08/2016
  2. Kajalsoni 11/08/2016
  3. Bajrang 12/08/2016

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