जलते चिराग़ ।

ज़िंदगी यूँ ही रौशन हो जाती नहीं, इस जहान में,
पहले, जलते हैं कई चिराग़, तेज़ रौशनी के लिए…!

चिराग़ = मददगार; (माता-पिता,रिश्तेदार,दोस्त-संगीसाथी);
रौशनी = प्रगति,विकास;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०९ अगस्त २०१६.

JALATE CHIRAG

6 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 11/08/2016
    • Markand Dave Markand Dave 12/08/2016
  2. Kajalsoni 11/08/2016
    • Markand Dave Markand Dave 12/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/08/2016
    • Markand Dave Markand Dave 12/08/2016

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