तुम्हारे बिन जीना है //गीत

तुम्हारे बिन जीना है पल-पल मुश्किल
बस तुम्हीं पे फीदा है मेरा दिल

तस्वीर बन बसी हो निगाहों में तुम
वो जानाँ मेरे हर साँसो में तुम
तू तकदीर है,तू दिल के अरमा
मेरे इन हाथो की लकीरों में तुम
तुम्हारे बिन जीना….

तुम्हीं से हर खुशी है तुम्हीं से आशिकी
मैं ठहरा सागर हूँ तू बहती नदी है
होले-होले आ तू मेरे दिल के करीब
आके मुझे मिल इंतज़ार हर घड़ी है
तुम्हारे बिन जीना है ….

देख रुमानी शाम बहार तू याद आती है
कोयल भी कू-कू करके पास तुम्हें बुलाती है
तेरी हुस्न की दीदार कर चेहरा खिल जाता है
तुझे बाहों में भर के ही मुझे चैन आता है
तुम्हारे बिन जीना है ….

तेरी चाहत की खुश्बू घुली है इन बयार में
न कर देर कहीं टूट न जाए तेरे प्यार में
दिल के दरवाज़ा मेरे लिये एक बार खोल
देख तेरे द्वार आया मैं बनके कान्हा चोर
तुम्हारे बिन जीना है….

कवि:- दुष्यंत कुमार पटेल”चित्रांश”

6 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 11/08/2016
  2. Kajalsoni 11/08/2016
  3. Dushyant patel 11/08/2016
  4. Dushyant patel 11/08/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/08/2016
  6. Dushyant patel 11/08/2016

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