अगर प्यार मुक्कमल न हो तो

प्यार – ये तो महज एक शब्द है, शायद जो खुद भी अपनी महत्वता को नही जानता, क्योंकि अगर मुक्कमल हुआ तो इसका वजूद है,अन्यथा यह एक अभिशाप है॥ वैसे तो समय की बराबरी न आज तक कोई कर पाया है ओर शायद ही कोई कर पाएगा, मगर ये ऐसा शब्द है जो मेरी विचारधारा से ‘समय’ के लिए भी ग्रहण है॥ क्योंकि अगर यह है तो समय नही है॥हाहाहाहाहा अब ऐसी बात कहने जा रहा हू जो समझ मे आई तो काफी लोगों के दिलो को ठेस पहुँचाने में कोई कसर बाकी नही छोड़ेगी..यह एक ऐसा रोग है,अगर एक बार लग जाए और मुकम्मलन न हो तो व्यक्ति इस प्रकार जीवन व्यतीत करता है जिस प्रकार एक शराबी शराब छुड़ाने के लिए अन्य दूसरी वस्तुओं का सेवन करता है॥ कृपया मुझे छमा करें। परंतु तुम्हें जरा भी भयभीत होने की जरूरत नही है..क्योकि जिनसे आप भयभीत हो रहे हो उन्हे ये बात शायद ही समझ आए और आ भी गयी तो सिर्फ 4 दिन से ज्यादा नही रहने वाली..क्योंकि उन्होने जीवन ही कुछ इस प्रकार व्यतीत किया होता है।यदि मैं ये कहूँ की इस संसार को सिर्फ “समय” चला रहा है तो गलत नही होगा। क्योकि यदि समय सब भुला कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित न करे तो सब कुछ वही की वही रुक जाए।

प्यार एक निरोग-रोग है, समय संसार है
प्यार स्वयं-इक्षा से ठील छोड़ता है॥ और समय उसे जकड़ लेता है।

वैसे तो इस संसार मे प्यार के बहुत बड़े-बड़े उदाहरण उपस्थित हैं मगर ये अपने आप मे एक ऐसा उदाहरण है जो किसी भी उदाहरण का मोहताज नही है अगर यह उपस्थित है तो। यह इंसान की जिंदगी मे आया हुआ एक ऐसा अंधेरा है जो इंसान को नेत्रवान होते हुये भी नेत्रहीन कर देता है। इंसान का मस्तिस्क सिर्फ एक ही दिशा मे गतिशील होता है और मजेदार बात तो ये है की उस रास्ते मे आई हुई रुकावटों का सामना इंसान अपनी छमता से कहीं अधिक शक्ति से करता है।

समय की दो महत्वपूर्ण रचनाएँ है- प्रातःकाल और सांयकाल
सांयकाल बीती बातों को भूलने के लिए॥और प्रातःकाल एक नयी किरण के लिए।

मेरे दिये गए इस शीर्षक के अनुसार अगर कोई भी व्यक्ति यह जानना चाहता है कि अगर किसी के जीवन में इस तरह का वाकया घटित होता है तो ऐसी स्थ्ति का समाधान क्या होना चाहिए। तो दोस्तो मेरी विचारधारा से या तो तुम सिर्फ अपना जीवन इस तरह व्यतीत कर लो जैसा की मैंने अपने प्रथम अनुच्छेद में कहा है अन्यथा एक ही बात कहना चाहूँगा कि दो दिन जिया हुआ जीवन भी जीवन ही होता है ओर दो साल जिया हुआ भी जीवन ही होता है ओर या फिर दो जन्म जिया हुआ जीवन भी सिर्फ जीवन ही होता है॥

मैं तो चला समय की ओर, समय बहुत बलवान
तुम्हारी इक्षा तुम पर निर्भर॥ भगवान करे कल्याण।

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  1. C.M. Sharma babucm 11/08/2016

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