जी करता है आज कलम तोड़ दूँ

जी करता है आज कलम तोड़ दूँ

जी करता है आज कलम तोड़ दूँ, दिली जज़्बातों का रुख तेरी तरफ मोड दूँ,
हर बात रूह की गहराइयों से होकर गुजरी है, इसके बाद जीना छोड़ दूँ,
जी करता है आज कलम तोड़ दूँ ,

तेरा आना, तेरा रहना और तेरा चले जाना, क्या वाकई दिली ख्वाइस थी
एक बार दिमागी झूठ से पर्दा हटा दूँ , हर तरफ सच छोड़ दूँ
जी करता है आज कलम तोड़ दूँ,

दिन निकलता है तो एक बात होती है, दिन ढलता है तो एक बात होती है,
या तो कभी ये बात ही न हो, या इस बात को बिल्कुल निचोड़ दूँ,
जी करता है आज कलम तोड़ दूँ

अभी जो है क्या वही सत्य है, अभी जो है क्या वही असत्य है
क्या अभी समय है सब जानने में, या अब संपूर्ण सब्र छोड़ दूँ,
जी करता है कलम तोड़ दूँ,

कल फिर एक नया सवेरा निकलेगा, कल फिर एक नयी उम्मीद जन्म लेगी
कल फिर एक इंसान जी उठेगा, कल फिर एक इंसान की मृत्यु होगी
इक्छा तो है बस एक बार, इस जीवन च्क्क्र को मोड दूँ,
जी करता है आज कलम तोड़ दूँ,

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/08/2016
  2. C.M. Sharma babucm 11/08/2016
  3. Kajalsoni 11/08/2016

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