वफ़ा और दोस्ती

वफ़ा और दोस्ती के नाम पर सब आजमाते हैं |
जो ग़र्दिश में हों तारे तो सब के सब सताते हैं ||

यहाँ पर कौन है ऐसा किससे पता पूंछूं
अलग सा मशविरा देते अलग रास्ता बताते हैं |

सलीका पढ़ने लिखने का जिन्हें अब तक नहीं आया
वही कुछ लोग हिंदुस्तान की सत्ता चलाते हैं |

करो न याद अपनों को तो अक्सर यूँ भी होता है
तुम उन्हें भूल जाते हो वो तुम्हे भूल जाते हैं |

एक दिन उनके घरों में अँधेरा हो ही जाता है
जो दूसरों के जलते चरागों को बुझाते हैं ||

-Padam shree

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  2. Saviakna Saviakna 10/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/08/2016
  4. babucm babucm 11/08/2016
  5. दीपेश जोशी 11/08/2016
  6. padam shree padam shree 11/08/2016

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