बेटी………………मनिंदर सिंह “मनी”

देख आ गया मेरे सिर का साई डोली लिए मेरी आज,
बाबुल लगा ले सीने से परायी हो चली बेटी तेरी आज,,

प्यारी सी नाजुक सी कली थी मैं तेरे घर के आंगन की,
कहे बोझ जग बेटी को, तुझे उस बोझ से कर दिया बरी आज,,

तेरी ऊँगली पकड़ ज़माने के साथ कदम मिला चलना सीखा,
ना मिलूंगी चौखट पर तेरा इंतज़ार करती छोड़ चली तेरी घरी आज,,

मुस्कराहट के पीछे छुपा ना अपने आँसू, छुपाये नहीं जायेंगे तुझसे,
तेरी दुआए, तेरे संस्कार, ले चली बाबुल तेरी प्यारी नन्ही परी आज,,

मेरी हर ख़ुशी पर अपनी हर चाहत लुटा दी, बिना कुछ सोचे समझे,
मैंने भी बेटी धर्म निभाया, खुश रहना मेरे बाबुल देख अपनी पगड़ी खरी आज,,

घरी……घर

18 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/08/2016
    • mani mani 10/08/2016
  2. babucm babucm 10/08/2016
    • mani mani 10/08/2016
  3. Kajalsoni 10/08/2016
  4. mani mani 10/08/2016
    • mani mani 10/08/2016
  5. mani mani 10/08/2016
  6. sarvajit singh sarvajit singh 10/08/2016
    • mani mani 10/08/2016
  7. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 10/08/2016
    • mani mani 10/08/2016
  8. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 10/08/2016
    • mani mani 10/08/2016
  9. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/08/2016
    • mani mani 10/08/2016

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