“धरोहर”

तुम्हारे मीठे-तीखे शब्दों की एक
खेप को बड़ा संभाल के रखा था।
सोचा, कभी मिलेंगे तो
मय सूद तुम्हें लौटा दूंगी।
अचानक कल तुम मिले भी
अचेतन मन ने धरोहर टटोली भी।
मगर तुम्हारी धरोहर लौटाने से पहले ही
भावनाओं के दरिया की बाढ़ बह निकली।
और मैं न चाहते हुए अनचाहे में ही सही
आज फिर एक बार तुम्हारी कर्ज़दार ही ठहरी।

“मीना भारद्वाज”

12 Comments

    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 10/08/2016
  1. babucm babucm 10/08/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 10/08/2016
  2. Kajalsoni 10/08/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 10/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/08/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 10/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/08/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 10/08/2016
  5. ALKA ALKA 11/08/2016
  6. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 11/08/2016

Leave a Reply