हे सूर्य यह दुनिया तो है तेरी दास

माना जग में राज है तेरा
सब पर रौब जमाते हो
सोऊँ जब. सुंदर सपनों में
आकर तुम जगाते हो

जग सारे से है रिश्ता तेरा
हिस्सा उसमें है कुछ मेरा

प्राणों में फूकते प्राण हो तुम
अंधेरों से करते घमासान हो तुम

खुले जो आँख तुझे सामने पाऊं
देख चहूँ ओर मैं शीश नवाऊँ
सँवारी है तूने दुनिया यह सारी
किउं सोच सोच मैं मुस्काऊँ

हो ऊर्जा से भी ओत प्रोत तुम
फैला दुनिया में तेरा प्रकाश
हे सूर्य
यह दुनिया तो है तेरी दास

कहीं अगर तुम हो खो जाओ
कहाँ बचेंगे फिर प्राण पंखेरू
कहाँ बचेगी कोई आस
उष्णता तेरी देती हमें है
जीवित रहने का आभास
हे. सूर्य
यह दुनिया तो है तेरी दास

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 10/08/2016
  3. mani mani 10/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/08/2016
  4. C.M. Sharma babucm 10/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/08/2016
  5. Kajalsoni 10/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/08/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/08/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 10/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/08/2016

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