एक सवाल -पियुष राज

एक सवाल

अचानक मेरे मन मेँ
एक सवाल आया
भगवान् ने इस दुनिया में
इंसान को क्यों बनाया

इस दुनिया में लाने को
माँ को आधार बनाया
रिश्ते-नाते जोड़कर सबसे
हमें मोह-माया मेँ फँसाया

छल-कपट से दूर रखकर
हमारा बचपन बनाया
धीरे-धीरे जब बड़ा हुआ
तब रिश्ता-नाता समझ में आया

मोह-माया के चक्कर ने
मुझे बुरी तरह फँसाया
कोई अपना,जब छोड़ गया
उसकी याद ने बहुत रुलाया

सब को जाना है एक दिन
मैं, कैसे ये भूल गया
जिसने बनायीं ये दुनिया
मैं,उस रब को ही भूल गया

चकाचोंध की दुनिया में
चाहे जितना हो गुमान
जिंदगी की हकीकत को
अंत में बताता है शमशान

छंभंगुर है यह जीवन
सबको एक दिन जाना है
जिस मिट्टी से बने है सब
फिर उसी में मिल जाना है।

©पियुष राज,दुधानी, दुमका।
28/05/16 (Poem No:21)

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  2. mani mani 10/08/2016
  3. C.M. Sharma babucm 10/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/08/2016

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