मिश्रा जी के दोहे

अंगूर सूखे किशमिश बने आम सूखे आचार
अदरक सूखे सोंठ बने चूसे मिटे गले का विकार
दूध जमे तो दही बने फट जाये तो बने पनीर
बांज की जड़ को खोदिये मिले नीर ही नीर
अखवार की रद्दी मत फेंकिये चाहे कबाड़ी चिल्लाय
थोड़ी मेहनत काट छाँट कर लिफाफे तक बन जाय
बेकार पानी मत गिराइये राह मे कीचड़ तक हो जाय
कर गढ्ढा आंगन मे इसको वाटर लेबल दियो बढ़ाय
खाली डब्बा मत फेंकिये थोड़ी मेहनत कर ली जाय
भर मिट्टी थोड़ी सी इसमे हरा पौधा तक लग जाय
जबरन डाई मत कीजिये चाहे नाई चिल्लाय
चार बाल के फेर मे चार सौ सफेद हों जाय
फैशन ऐसा कीजिये जा मे लज्जा तक ढक जाय
वो कपड़ा किस काम का जा मे बुरी नजर लग जाय
गाय को मत सताइये ये तो माता कहलाय
गोबर गोमुत्र से पवित्र रहे घर दूध से ताकत आय
बनियान गर फटने लगे मत दियो इसे फेंकाय
लियो लठ्ठ मे बाँध इसे पोछा तक लग जाय
शराब सिगरेट मत पीजिये जो हैं तन के विकार
मेरा जैसा मन राखिये आये स्वच्छ विचार
प्रभू गुण ऐसा दीजिये जो करुँ जगत समान
भूखा कोई ना रहे सबको मिले मकान (अनूप मिश्रा)

3 Comments

  1. shivdutt 09/08/2016
  2. babucm C.m.sharma(babbu) 09/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/08/2016

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