दृढ़ संकल्प

जब सुलग उठी एक ज्वाला सी, उस अलसाते अंधियारे में |
जब फूट पड़ी एक स्वरलहरी, उस सहमे से गलियारे में ||

उड़नतस्तरी को लेकर अब उड़ जाने दो, मत रोको |
सारे अरमानो को लेकर अब हंस लेने दो, मत टोको ||

क्या बात हुई, जो हम पीछे हैं, आगे गए जमानों से |
लेकर मशाल अब निकल पड़े, जीतेंगे हर तूफानों से ||

हाँ, है अधिकार हमारा भी, तुम ना मानो तो मत मानो |
अपने बचपन को याद करो, सोचो तब शायद तुम जानो ||

नहीं अतिरंजित यह रणभेरी, ना समझो अब यह थम लेगा |
जब गूंजेंगे हम धरती पर, तब ही समझो रंग जम लेगा ||

-धीरेन्द्र

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