संकट-मोचन! राम सखा! -रामबली गुप्ता

किरीट सवैया

संकटमोचन! राम-सखा! तुम,
बुद्धि-दया-बल-सद्गुण-सागर।

दीन-दुखी अति निर्धन मैं कपि!
विघ्न-विपत्ति-विकार हरो हर।।

घोर अँधेर बढ़े उर में अब,
आश-प्रभा प्रभु! दो हिय में भर।

डूब रही तरणी मग मे मम,
आकर लो अब थाम प्रभो! कर ।।

रचना-रामबली गुप्ता

हर=सभी, प्रत्येक
तरणी=नाव
मग=राह
कर=हाथ

जय बजरंगबली

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/08/2016
    • रामबली गुप्ता 11/08/2016
  2. C.M. Sharma babucm 09/08/2016
    • रामबली गुप्ता 11/08/2016
  3. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 09/08/2016
    • रामबली गुप्ता 11/08/2016
  4. Kajalsoni 09/08/2016
    • रामबली गुप्ता 11/08/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/08/2016
    • रामबली गुप्ता 11/08/2016

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