करप्सन – बी पी शर्मा बिन्दु

परदे में कुछ रहा नहीं अब परदे के सब बाहर है
करप्सन खुली किताब फिर भी सरकार कायर है।

कहीं घोटाला कहीं हवाला कहीं धमाका फायर है
खेलाड़ी आतंकी है क्यों आतंकबाद अम्पायर है।

हर दास्तावेज पर अब घूस की मोहर चलती है
कानून चाहे जो भी हो झूठ की बोली लगती है।

कौन देखता किसको यहाॅ कौन भूखा और नंगा है
गरीब के लिए बाढ़-सूखा और हर चीज मंहगा है।

समय बदलता है पर आदत आज तलक नहीं बदली
सफेदपोश घूमते खुले आम कौन असली और नकली।

लोग उल्लू सीधा करने में दूसरे का पैर काट देते
पैसे के लिए अपना मरा फोटो पोस्टर में साट देते।

मानवता की बात इंसान अब हैवान से क्या करे
एक नासमझ बेईमान शैतान से उम्मीद क्या करे।

गरीब भूख में सोया तो जहाॅ का वहीं पड़ा रह जाता
सरकारी गोदामों में अनाज सड़ा का सड़ा रह जाता।

मरने के बाद मीड़िया ही बस्ती में भीड़ जुटाती है
बदले में चार बोरी अनाज जनता को दे जाती है।

जनता और सरकार सब कुछ देखती और जानती है
मुक दर्शक जनता कुदती है सरकार बेवाक फाॅदती है।

इसी तरह चलती है दुनिया कहीं विश्वास तो कहीं झाॅसा
वाह रे खेल वाह रे तमाशा कहीं आशा तो कहीं निराशा।

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

10 Comments

  1. babucm babucm 09/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 09/08/2016
  2. mani mani 09/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 09/08/2016
  3. Kajalsoni 09/08/2016
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 09/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 09/08/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 10/08/2016

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