जमाना – बी पी शर्मा बिन्दु

वाह रे! बंदर बाट का जमाना
कहीं पर निगाहें तो कही पर निशाना ।

अपनी बर्बादी का मंजर भला कौन नहीं देखता
काट देता समय पर वो खंजर कौन नहीं देखता
वाह रे! कुल्फी-चाट का जमाना
कहीं पर निगाहें तो कही ।

नजरें क्या बदली नाजराना ही बदल गया
सामने आ गया मर्द जनाना ही बदल गया
वाह र!े यादव-जाट का जमाना
कहीं पर निगाहें तो कही ।

हम देखते रह गये और वह छू मंतर हो गया
बात ऐसी की उसने बाहर से अंदर हो गया
वाह रे! डब्लू-डब्लू डाॅट का जमाना
कही पर निगाहें तो कही ।

समय पर बदल लो अपने आप को
और कभी न दूध पिलाना साॅप को
वाह रे! पैसा-नोट का जमाना
कही पर निगाहें तो कही ।

करना है गर तुमको तो बस नाम करो
गीता से जो तुमने सिखा वो काम करो
वाह रे! नीति और वोट का जमना
कही पर निगाहें तो कही ।

बाटना है तो सबको अपना प्यार बांटो
ऐसा ही जीवन से जीवन का उपहार बांटो
वाह रे! े अदालत-कोट का जमाना
कही पर निगाहें तो कही ।

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

8 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 09/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 09/08/2016
  2. mani mani 09/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 09/08/2016
  3. Kajalsoni 09/08/2016
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 09/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 09/08/2016

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