“बेटी “- – – काजल सोनी

गम में न करती हूँ ,
फरियाद कीसी से ,
नाकाम हसरतो में भी,
जी लेती हूँ ।
दे दे अगर कोई जहर का प्याला ,
ये कहकर कि प्यार है ,
वो भी हंसकर पी लेती हूँ ।
आपार ममता को ,
ऑचल मे अपने समेटी हूं ।
मत दुत्कारो मुझे,
न मारो मुझे ,
मै तुम्हारी ही नही,
कुदरत की भी एक “बेटी ” हूँ ।

मुझसे ही बढेगा ,
ये संसार तुम्हारा ।
मर कर भी निभा जाऊंगी,
प्यार तुम्हारा ।
दर्द का निवाला खा लेती हूँ ।
नफरत का जहर पी लेती हूँ ।
दुखो की आग मे जलते रहती हूँ ,
दरिंदगी भरी नजरे,
चुपचाप सहते रहती हूँ ।

कई रुप है मेरे ,
प्रेमिका बन कर ,
अरमान सजा जाती हूँ ।
पत्नी बनकर ,
संसार सजा जाती हूँ ।
माँ बन कर ,
ममता बरसा जाती हूँ ।
जब तक रहती हूँ “बेटी “,
भाई बहन, घर बार सजा जाती हूँ ।
ज्वाला बन ,
हूँ अग्नि मे भी लेटी ।
अपनाकर तो देखो मुझे ,
हूँ मै आपकी आपनी “बेटी ” ।।

” काजल सोनी ”

16 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 09/08/2016
    • Kajalsoni 09/08/2016
  2. mani mani 09/08/2016
    • Kajalsoni 09/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/08/2016
    • Kajalsoni 09/08/2016
    • Kajalsoni 09/08/2016
  4. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 09/08/2016
    • Kajalsoni 09/08/2016
  5. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 09/08/2016
    • Kajalsoni 09/08/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/08/2016
    • Kajalsoni 09/08/2016
  7. shivdutt 09/08/2016
    • Kajalsoni 09/08/2016

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