सुकून !!!

नीलाम करके खुद्दारी को
जो पायी है हमने बदले में I
उस ‘हैसियत’ का ही शोर है
जो सुकून आने नहीं देता II

या यूँ , कि मिटाए नहीं मिटता
उस ‘खरीदार’ का अक्स I
एहसास के रंग जो उकेर देते हैं
तन्हाई की उस दीवार पर II

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2016
  2. mani mani 08/08/2016
  3. Kajalsoni 08/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/08/2016
  5. babucm C.m.sharma(babbu) 08/08/2016
  6. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 08/08/2016

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