“शीतलेश चला कविता लिखने”

रोज सुबह घडी के बजते ही सात ,
शुरू शीतलेश की भागम-भाग ,
एक कॉपी , पेन लिए हाँथ ,
शीतलेश चला कविता लिखने।

जब बैठे लिखने तो सोचे ,
काव्य संकलन के कितने लोचे ,
सोच सोच बालो को नोचे ,
शीतलेश चला कविता लिखने।

शीतलेश बेटा हुआ निराश ,
काव्य संकलन सत्यानाश ,
शीतलेश मन फिर हुआ हताश ,
शीतलेश चला कविता लिखने।

शीतलेश मन जगी एक आस ,
“मधुकर जी” ने बुलाया पास ,
काव्य संकलन को बनाया खास ,
शीतलेश चला कविता लिखने।

खुले शीतलेश के भाग्य के द्वार ,
“निवतिया साहब” ने बतलाया ज्ञान भण्डार ,
हुआ काव्य संकलन विस्तार ,
शीतलेश चला कविता लिखने।

शीतलेश जब भी लिखे कविता ,
खुश हो जाते माता-पिता ,
माता-पिता :- “बेटा बड़ा होकर क्या बनेगा”
मैंने कहा :- “शीतलेश बड़ा होकर कवि बनेगा “

11 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 08/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 08/08/2016
  3. mani mani 08/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 09/08/2016
  4. Kajalsoni 08/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 09/08/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 09/08/2016
  6. babucm C.m.sharma(babbu) 08/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 09/08/2016

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