कस्ती – बी पी शर्मा बिन्दु

नदि किनारे कस्ती एक पड़ा मिला
और दूर गया तो शाहिल मरा मिला।

दंग रह गई मेरी निगाहें मेरे होश उड़ गये
अलग-अलग थे पहले वो आकर जुड़ गये।

बात समझ से दूर थी पानी भी कुछ दूर था
खुब मशहूर थी जगह मौसम में शरूर था।

अब पानी में कस्ती और कस्ती में हम थे
पतवार भी हम और मुसाफिर भी हम थे।

लालशा एक थी मेरी बस रूखसार हो जाये
अपनी मेहबूबा से फिर मुलाकात हो जाये।

खुदा खैर करे हम पहुॅच गये बस्ती में
इंतजार करते रहे आने की मस्ती में।

बस्ती से दूर कुछ इस तरह आम के बगीचे में
मिल ही गई मेरी मेहबूबाए उसी पेड़ के नीचे में।

जहाॅ हमनंे कसमंे खाई साथ जीनंे और मरने की
जमाने से लगता नहीं डर न दुश्मनों के जलने की।

पहले कठीन पढ़ाई फिर प्यार किया था मैंने
नौकरी लग गई अब पहले इंतजार किया मैंने।

हम खुश हंै हम दोनों के परिवार मान गये
प्यार समन्दर से भी गहरा है यह जान गये।

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

8 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 08/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 08/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 08/08/2016
  2. mani mani 08/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 08/08/2016
  3. Kajalsoni 08/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 08/08/2016

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