धरती माता की पुकार – बी पी शर्मा बिन्दु

धरती माता बोल रही है
सबकी आॅखें खोल रही है
अपनें ही संतानो से क्यों
खून की होली खेल रही है।

क्यों भाई-भाई लड़कर के
आपस में बैर बनाते हैं
ये ठीक नहीं मेरे प्यारे
अपनोें को गैर बनाते हंै।

क्यों जात-पात पर मरते हैं
क्यों धरम-करम को चरते हैं
लोभ-द्वेष में फसकर ही क्यों
सम्मान-मान को हरते हैं।

हम सब सहते ये जाते हैं
मन में ये गहते जाते हैं
कुछ सोचो और समझो भी
क्यों भटके अटके जाते हैं ।

मेरे आॅचल में आग लगा
क्यों धूएॅ-धूएॅ करते हो
युद्ध-महायुद्ध छेड़-छाड़
क्यों खोए खोए रहते हो।

अब अपने ही संतानों से
क्यों मुझको ड़रना पड़ता है
जाउॅ अब किस ओर किधर
ये मुझको कहना पड़ता है।

पर भूलुॅ कैसे अब तुमको
नहीं प्यार-ममता छोड़ रहा
मैं धंुट -धंुट कर जिती थी
फिर क्यों मेरा दम तोड़ रहा।

6 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 08/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 08/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 08/08/2016
  3. mani mani 08/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 08/08/2016

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