जग मिथ्या; शून्य सत्य

जग मिथ्या; शून्य सत्य
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सृष्टि में
तारों का बनना
और तारों का मिटना
एक सतत प्रक्रिया है

अनंत आसमान में
असंख्य तारे हैं
और उनमें से
हमें नज़र आते हैं
केवल वही तारे
जिनका प्रकाश
हम तक पहुँच पाता है

आसमान में
करोड़ों प्रकाशवर्ष की दूरी पर
संभव है कि
कुछ तारे
लाखों वर्ष पहले
नष्ट हो चुके हों
पर वे हमें
आज भी नजर आ रहे हों
क्योंकि
उनके नष्ट होने से पहले
चला हुआ उनका प्रकाश
हमारे पास
आज तक पहुँच रहा है

संभव यह भी है कि
हजारों वर्ष पहले
लाखों प्रकाशवर्ष की दूरी पर
जन्म हुआ हो कुछ नये तारों का
पर उनका प्रकाश
अभी तक हमारे पास
नहीं पहुँचने के कारण
वे हमें अभी नज़र न आ रहे हों

जरूरी नहीं कि
जो नज़र आता है
केवल वही सत्य हो
या जो नज़र नहीं आता
वह असत्य ही हो

दृष्टि का सत्य ही
सम्पूर्ण सत्य नहीं ǃ
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-गुमनाम कवि (हिसार)
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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2016

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