आवागमन

आवागमन
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शून्य अवस्था है
‘कुछ भी न होने की’

कुछ भी न रहे जब शेष
तब रहता है शून्य शेष

शून्य को
महसूस करने के लिए
जरूरी है शून्यमय होना

गुमनाम मन ने चाहा
शून्य को महसूस करना

इसलिए बनाया
पाँच ज्ञानेन्द्रियों
पाँच कर्मेंद्रियों और
पाँच प्राणों से बने
तन को शून्य
मन को शून्य
बुद्धि को शून्य
चेतना को शून्य
चिंतन को शून्य
. . . . . . . . . .
. . . . . . . . . .

शून्य बनकर
शून्य में प्रवेश कर
शून्य गति से
शून्य रूप में
शून्य से
निकल तो गया
शून्य को
शून्य छोड़कर
पर
शून्य में प्रवेश करने
शून्य को महसूस करने
शून्य से निकलने के
तमाम अनुभव भी
रहे शून्य ही
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-गुमनाम कवि (हिसार)
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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2016

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