शून्य : पूर्ण रिक्तता

शून्य : पूर्ण रिक्तता
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शून्य
अवर्णनीय मगर
अवस्था है यह
पूर्ण रिक्तता की

एक
अनुभूति है यह
सबकुछ हो कर भी
कुछ न होने की
और कुछ न होकर
सबकुछ होने की

सुख-दुःख
हर्ष-विषाद

धूप-छाँव
अंधेरा-उजाला

सर्दी-गर्मी
पतझड़-बसंत

सुबह-शाम
दिन-रात

सोते-जागते
उठते-बैठते

चलते-फिरते
खाते-पीते

……………
……………

महसूस किया है
इस रिक्तता को
अपने अंदर मैंने
सभी स्थितियों में
सदा ही ……. !

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-गुमनाम कवि (हिसार)
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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  2. babucm babucm 08/08/2016

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