मेरे दोहे : उत्कर्ष

पालीथिन से मर रही,गायें रोज़ हज़ार ।
बन्द करो उपयोग अब,नही जीव को मार ।।

वर्षो तक गलता नही,नही नष्ट जो होय ।
दूषित पर्यावरण करे,नाम पॉलिथिन सोय ।।

कपडे का थैला रखो,छोड़ पॉलिथिन आज ।
वर्षो तक गलता नही,दूषित करे समाज ।।

मांग भरी तुझ नाम की,हाथ मेहँदी रंग ।
हरे कांच की चूड़ियां,पहन चली वो संग ।।

परिणय कर प्रीतम चले,छोड़ उसे,परदेश ।
पूछ रही वो गोरडी,कब आवोगे देश ।।

हरे कांच की चूड़ियां,तके पिया की राह ।
विरह दुख संताप में,पल पल भरती आह ।।

लिखी प्रेम की पातरी,सजनी साजन नाम ।
सूनो तुम बिन घर लगे,सूनो सगरो गाम ।।

सजन पढ़े जब पातरी,जीव गयो अकुलाय ।
जल्द मिलेंगे जोगनी,काहे रही सताय ।।

Mr.Naveen Shrotriya”UTKARSH”
नवीन श्रोत्रिय”उत्कर्ष”
Shrotriya Mansion,Bhagwati Colony,
श्रोत्रिय निवास, भगवती कॉलोनी,
Bayana, Rajasthan 321401
बयाना ,राजस्थान ३२१४०१
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2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2016

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