एक चिड़िया, करती तंग मुझे

एक चिड़िया, करती तंग मुझे
दिन-रात सताती रहती है,
वो खिड़की पर ही रहती है
चुलबुल सी है,मस्तानी सी
यूँ आती है, यूँ जाती है

एक चिड़िया करती तंग मुझे
हर रोज इशारे करती है
फ़ुदक-फ़ुदक कर रहती है
बात बात पे, जाने क्यों
मुझसे डरती रहती है

एक चिड़िया, करती तंग मुझे
हर वक़्त जो लड़ती रहती है
बस चूं-चूं, चिं-चिं करती है
जानी सी कुछ अनजानी सी
फिर भी, भाति रहती है,
एक चिड़िया करती तंग मुझे……. contineu

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