लघु कथा : सच्चा प्रेम “उत्कर्ष”

“लघु कथा : सच्चा प्रेम”
“मेरा तीसरा प्रयास,सादर समीक्षार्थ प्रेषित”
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पिता की डाँट फटकार को सबहि
उनकी नाराजगी समझते है,उनका
गुस्सा समझते है,पर एक पिता का
हृदय समझ से परे होता है,वह एक
नारियल की भांति होता है,बाहर से
सख्त और अंदर से कोमल,यह बात
पहले मेरी समझ से भी बाहर थी,
परंतु जब यथार्थ से परिचय हुआ तो,
में भी सन्न रह गया,पिता होता ही
ऐसा है,वह बच्चे के भविष्य का ध्यान
रखते हुए ऐसा रुख अपनाता है ।
बात पिछले कुछ दिनों की है,पिताजी
मुम्बई जाने की तैयारी करने लगे,
पहली बार शहर से दूर जा रहे थे,मन
विचलित था,कैसे इतने बड़े शहर में
रहेंगे पहली बार घर से दूर जा रहे है,
सीधे स्वभाव के है अनजान शहर है,
आजकल लूटपाट,चोरी जैसे घटनाएं
इन बड़े शहरो में सामान्य बन कर रह
गयी है, मेरे मन में अनहोनी की शंका
जन्म ले रही थी,मन भी आशंकित था,
आखिर कैसे ये ट्रेन का सफ़र अकेले
कर पाएंगे, आज तक तो सिर्फ घर से
ऑफिस तक रहे है,फिर भी मन मार-
-कर उनका सामन पेक करवाने में
लगा रहा,सारा सामान पेक हो गया,
बस घर से निकलने की तैयारी करने
लगा,शाम को 10 बजे की ट्रेन थी,
नौ बज चुके चुके थे,मन पर बोझा रख
उनको साथ लेकर स्टेशन की तरफ
चल दिया,स्टेशन पर पहुँच कर बार बार
उनको समझा रहा था, फोन चालु
रखना,किसी अनजान व्यक्ति का दिया
हुआ खाना मत खाना,और स्टेशन पर
उतर कर,फोन कर लेना, वहां हर तरह
के लोग रहते है,किसी की बातो में मत
आना,आजकल लोग स्वार्थी है,आप
घर जाने के लिए टैक्सी किराए पर ले
लेना, ट्रेन के चक्कर में न पड़े,बहुत
भीड़ जाती है,आप उसमे नही बैठ
पाओगे,तभी ट्रेन का अनाउंस हुआ,
ट्रेन आने वाली है, मन चिन्ताओ से
घिर गया,धड़कन तीव्र चलने लगी,
साँस अवरुधित होने लगी,ट्रेन आ गयी
प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की भीड़ बहुत
अधिक थी,जब यही ऐसा हाल है तो
आगे न जाने कैसा हाल होगा,ट्रेन के गेट
पर मत खड़े होना,अधिक है,
किसी की चिकनी चुपड़ी बातो में मत
आना पिताजी को कहते हुए ट्रेन में
सामान रखने लगा, पिताजी गुस्से से
बोले मुझे मत सीखा,तूने मुझे बड़ा
नही किया है बल्कि मैंने तुझे बड़ा
किया है ।
उनका गुस्सा में अपने में प्यार लिए हुए था,
अब पिताजी ट्रेन में बैठ चुके थे,ट्रेन
का हॉर्न बजने लगा,कंठ भर आया,
आँखों से पानी झरने लगा,
इधर पिताजी भी मुझे देख कर
उदास हो गए,उस दिन मुझे कही लगा,
की मैं आजतक जिनकी डाँट फटकार
को,उनकी नाराजगी समझ रहा था,
असल में वह उनका प्रेम है ।
✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”©
श्रोत्रिय निवास बयाना

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2016
  2. Kajalsoni 08/08/2016
  3. Manjusha Manjusha 11/08/2016
  4. नवीन श्रोत्रिय "उत्कर्ष" नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष 11/08/2016

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