गजल ( मेरी ख्वाहिश ) : “उत्कर्ष”

??गजल : मेरी ख्वाहिश??
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देश की शान मैं यूं बढाता रहूँ ।
शीश झुकने न दूं मैं कटाता रहूँ ।

काट दूँ हाथ वो,जो उठे देश पर,
दुश्मनो को युँ हीं मैं मिटाता रहूँ ।

में लड़ाई लड़ूं आखिरी सांस तक,
दुश्मनो को ठिकाने लगाता रहूँ ।

है तमन्ना यही साँस टूटे यहीं,
मात की गोद में प्यार पाता रहूँ ।

मौत भी गर मिले,फर्ज की राह में,
चूम लूँ मौत को,पर निभाता रहूँ ।

आरजू है मे’री जाऊँ’ तम पार तक,
दीप बनके उजाला बिछाता रहूँ ।

प्रीत रख देश से मातु बापू कहें,
हर जनम में तुझे पूत पाता रहूँ ।

सो रहे जो अभी जाग जाओ सभी,
भोर बनके सभी को जगाता रहूँ ।

देश का हर सिपाही कहे बस यही,
में सुमन की तरह,जां लुटाता रहूँ ।

✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”©
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11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/08/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  3. C.M. Sharma babucm 08/08/2016
  4. Kajalsoni 08/08/2016
  5. Manjusha Manjusha 11/08/2016
  6. नवीन श्रोत्रिय "उत्कर्ष" नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष 11/08/2016

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