वक़्त

वक़्त को दीवार पर टांग रखा है
और जब देखता हूँ शक्ल उसकी
जैसे कोई बेबस.. तिलमिलाता हुआ
लाख मजबूरियाँ..पर जिंदगी बसर करता

फिर रात के सन्नाटों में आकर मुझसे
वो मेरे कान में कुछ फुसफुसा के कहता है
अपनी उम्र का दम घुटते सुना है तुमने??
और टिक-टिक सी इक आवाज़ सुना जाता है..

– सोनित

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/08/2016
  2. सोनित 07/08/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 07/08/2016
  4. ALKA ALKA 07/08/2016
  5. babucm C.m.sharma(babbu) 07/08/2016
  6. सोनित 07/08/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 07/08/2016
  8. सोनित 07/08/2016
  9. Kajalsoni 08/08/2016
  10. सोनित 08/08/2016

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