मुक्तक ः उत्कर्ष

विधा : मुक्तक
मापनी : 1222×4

चला चल चाँद के पीछे दिलो में प्रीत फिर होगी ।

निशा आई उजाले भर अमन की जीत फिर होगी ।

जमाना क्या कहेगा सोच कर मत हार तुम जाना ।

दिलो को जीत लेने की नई सी रीत फिर होगी ।

✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”©
श्रोत्रिय निवास बयाना

उत्कर्ष रचित

उत्कर्ष रचित

8 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/08/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/08/2016
  4. babucm C.m.sharma(babbu) 07/08/2016

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