मुक्तक ः उत्कर्ष

हम आज़ादी के दीवाने है,
……. इंकलाब ही नारा है….

उतनी नही हमे जां प्यारी,
…….जितना देश प्यारा है…

बुरी निगाहे डालो ना तुम,
……..भारत की प्राचीरों पे..

खौला ये तो हुआ खात्मा,
…….खून नही यह पारा है…
==================
✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”©
==========≠=======
15 अगस्त /स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम बधाइयाँ

एन के उत्कर्ष

एन के उत्कर्ष

18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/08/2016
  2. babucm C.m.sharma(babbu) 06/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/08/2016
  5. Kajalsoni 07/08/2016
    • नवीन श्रोत्रिय "उत्कर्ष" नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष 11/08/2016
  6. नवीन श्रोत्रिय "उत्कर्ष" नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष 11/08/2016

Leave a Reply