मुनिया

उस वृक्ष की पत्तियाँ
आज उदास हैं
और उदास है
उस पर बैठी वो काली चिड़िया

आज मुनिया
नहीं आई खेलने
अब वो बड़ी हो गई है
उसका ब्याह रचाया जायेगा

गुड्डे-गुड्डी
खेल-खिलौनों
की दुनिया छोड़
मुनिया हो जायेगी
अब उस वृक्ष की जड़-सी स्तब्ध

और हो जाएगी
उसकी जिंदगी
उस काली चिड़िया-सी
जो फुदकना छोड़
बैठी है उदास
उस वृक्ष की टहनी पर।

 

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