**ख्वाहिश रखता हूं**

मेरी एक और बे सिर पैर की रचना-
(एक मित्र के आग्रह पर)-

****ख्वाहिश रखता हूं****

ना साथ की ख्वाहिश रखता हूं, ना प्यार की ख्वाहिश रखता हूं,
मैं सिर्फ तुम्हारे चेहरे के दीदार की ख्वाहिश रखता हूं l

हां मुझको तुम्हारी आंखों के ये खार कंटीले लगते हैं,
मैं ताउम्र तुम्हारे होठों के गुलज़ार की ख्वाहिश रखता हूं l

कुछ टूटे हुए से तुम भी हो, कुछ हारा हुआ सा मैं भी हूं,
मैं मान चुका हूं, तुमसे भी इकरार की ख्वाहिश रखता हूं l

है दूर तलक़ चलना भी मुझको मंजिल की टेढी राहों में,
मैं इस फेहरिश्त में तुम जैसे इक यार की ख्वाहिश रखता हूं ll

खार=आंसू
गुलज़ार=यहां आशय हंसी या मुस्कुराहट से है
इकरार=मान लेना
फेहरिश्त=सिलसिला

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-Er Anand Sagar Pandey

14 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 06/08/2016
      • Er Anand Sagar Pandey 06/08/2016
    • Er Anand Sagar Pandey 06/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/08/2016
    • Er Anand Sagar Pandey 06/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/08/2016
    • Er Anand Sagar Pandey 06/08/2016
  4. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 06/08/2016
    • Er Anand Sagar Pandey 06/08/2016
    • Er Anand Sagar Pandey 06/08/2016
  5. mani mani 06/08/2016
    • Er Anand Sagar Pandey 06/08/2016

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