संभल-संभल कर चलिए

संभल-संभल कर चलिए ये राह जिंदगी की,
ज्ञान का आदर करिये ये राह बंदगी की,
शिखर को बढ़े जाते हैं जो आधार भूलकर,
गिरने पर पाते हैं वो राह शर्मिंदगी की ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

20 Comments

  1. mani mani 05/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016
  4. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 05/08/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 05/08/2016
  6. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 05/08/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/08/2016
  8. अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 06/08/2016

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