एक बात ‘जो तुम्हारे बारे में है’..

जानती हो
क्या कहते है लोग
कहते है की
लिखता हूँ, तुम्हारे बारे में
हर बात होती है
तुमसे जुड़ी, तुम्हीं पे सिमटी

शायद, सही कहतें है
इस प्रेरणा का स्त्रोत
तुम्ही तो हो

तुम्ही से फूट कर निकलती है
स्याहियों की हर कड़ियाँ
ये झड़ियाँ,
उपमा, रूपक, और अलंकार की

क्या करूँ अब ?
ठहर नहीं पता
चला जा रहा हूँ
बस चला जा रहा
तुम्हारे बिना कभी
तो, तुम्हारे साथ ……..

14 Comments

  1. mani mani 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
  4. babucm C.m.sharma(babbu) 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
  5. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 06/08/2016

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