“सफरनामा”

फिर वही कड़ियाँ,
वही गूँज…….
वही पेड़ों की कतारें,
वही हरियाली…
लिखता हूँ इनके बारे में,
एक बार फिर…
बैठी है वही जमात,
एक बार फिर,,,
खिड़कियों पर….
प्रपंच और आशाओं से भरी
चाँद-सूरज की,
आंखमिचौली में लिपटी
पूर्ण-अपूर्ण, हर बातें,
जिन्हें पीछे छूट जाने की
होती है, ज़ल्दबाजी,
और मन उत्साह से
हो जाता है, लबरेज,
मंजिलें यूँ आती है, जाती है
और आती-जाती रहती है
पर ये जो ‘सफर’ है
हर बार की तरह
इस बार भी, नया है
वही ढेरों लोग हैं,
वही नयी बातें,
आप और हम …
छण भर के लिए ही
मिल जातें है बस
मुसाफ़िर की तरह, इस सफर में……
……….२१/०६/१६ (यात्रा विवरण)

10 Comments

  1. mani mani 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
  4. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 05/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016

Leave a Reply