बदलते तेवर

दफ्तर से जब मे घर पहुचा
कोलिन्ग बेल का बटन दबाया
हैरत मै पड़ गया जब दरवाजे पर
नौकरानी की जगह श्रीमतीजी को पाया

श्रीमतीजी मुस्कुराती है
धीरे से फरमाती है
घर का खाना तो रोज खाते है
चलो आज होटेल मे खाकर आते है

उनके आगे मेरी
एक भी न चलती है
मै वही करता हु
जो वो कहती है

खाना हुमने जी भर खाया
बदले मे बडा भारी बिल भी आया
मैने देख जेब मेरी खाली है
शायद मेरी पर्स किसी ने मार ली है

श्रीमतीजी मुक्षपर क्षल्लाई
बडे जोर से चिल्लाई
घर पर नौकरानी नही है आयी
बर्तन न माक्षना पडे मुक्षे
इसीलिए आपके साथ होटेल मे आयी

अब जल्दि घर जाकर
पैसे लेकर आओगे
या मुक्षसे यहा भी
बर्तन ही मजवाओगे

11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/08/2016
    • sudarshan41 05/08/2016
  2. sudarshan41 05/08/2016
  3. babucm babucm 05/08/2016
    • sudarshan41 05/08/2016
  4. Kajalsoni 05/08/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016
  6. अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016
  7. mani mani 05/08/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/08/2016

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