एक ग़ज़ल – यह भी ……

तुम जो रूठी हो तुम्ही बताओ कि हम तुमको मनाएं कैसे….
अपने दिल से ही पूछो तुम हम क्यूँ बताएं के मनाएं कैसे…

तुम को है हुस्न पे तो हम को भी है अपने इश्क़ पे गरूर….
होगा पर हम हैं हुस्न तो इश्क़ के हर नाज़ को उठाएं कैसे….

तुम हो इश्क़ के परवाने तो हर कली पे फिर मचलते क्यूँ हो….
मगरूर हुस्न ना दे गर साथ तो हम दिल को फिर बहलायें कैसे…..

तुमको क्या पता कैसे गुजरती है रातें मेरी तनहा सी हर पल….
दीवाना है तेरे इश्क़ का दिल मेरा भी अब इसको समझाएं कैसे….

चलो मान जाते हैं दोनों ही एक दुसरे से ऐ मेरे हमनशीं मेरे दिलबर….
फिर ना जाने वक़्त कब कहाँ कैसे हम को मिलाये और मिलाये कैसे….
\
/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

23 Comments

  1. RAVINDRA KUMAR RAMAN RAVINDRA KUMAR RAMAN 05/08/2016
    • babucm babucm 05/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/08/2016
    • babucm babucm 05/08/2016
    • babucm babucm 05/08/2016
    • babucm babucm 05/08/2016
  3. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 05/08/2016
    • babucm babucm 05/08/2016
  4. Kajalsoni 05/08/2016
    • babucm babucm 05/08/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016
  6. babucm babucm 05/08/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/08/2016
    • babucm C.m.sharma(babbu) 05/08/2016
  8. mani mani 05/08/2016
    • babucm C.m.sharma(babbu) 05/08/2016
  9. sarvajit singh sarvajit singh 05/08/2016
    • babucm C.m.sharma(babbu) 05/08/2016
  10. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 05/08/2016
    • babucm babucm 06/08/2016
  11. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 06/08/2016
    • babucm babucm 06/08/2016

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