मन !

मन भी क्या चीज हैं
सपनो की जंजीर हैं
चाहे वह पूरा हो या न हो
पर इसकी अपनी एक तकदीर हैं
कभी धरती कभी अम्बर
कभी पताल ले जाता हैं
बन के कभी बादल
हाथ नहीँ आता हैं
मन मार्गदर्शन करे
आँख सपनो को सजाता हैं
लाके ऐसे जग छोड़े
इंसान जीवन भर पशचाता हैं