अब आखिरी शंखनाद भी हो

बुलंद हुई आवाज अवश्य,
अब आखिरी शंखनाद भी हो !

पाक नहीं जिसका दामन,
परख की भी अति हुई,
ना जाने कितने बाशिंदों की,
असमय ही क्षति हुई,
सरहद के सूरमाओं की,
धोखे से नृशंस गति हुई,
बुलंद हुई आवाज अवश्य,
अब आखिरी शंखनाद भी हो !

चक्रव्यूह तैयार कर दो,
अब घेरने की है बारी,
सार्क से बाहर करवा दो,
छलिया से नहीं रखनी यारी,
सब मिलकर अब साथ चलो,
जिसने चुकाई कीमत भारी,
बुलंद हुई आवाज अवश्य,
अब आखिरी शंखनाद भी हो !

हमने हरदम अपना समझा,
अपने हुए न वो सपने में भी,
सेना-राजनीति हैं द्वेषित,
नफ़रत है बाशिंदों में भी,
घोल रहे विष घर में हमारे,
बची न शर्म शराफत में भी,
बुलंद हुई आवाज अवश्य,
अब आखिरी शंखनाद भी हो !

बुलंद हुई आवाज अवश्य,
अब आखिरी शंखनाद भी हो !

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

23 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 05/08/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 05/08/2016
  3. shivdutt 05/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/08/2016
  5. Er Anand Sagar Pandey 05/08/2016
  6. Kajalsoni 05/08/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016
      • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 05/08/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/08/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/08/2016
  9. sarvajit singh sarvajit singh 05/08/2016
  10. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 05/08/2016

Leave a Reply