इन्तजार

इन्तजार
इन्तजार
एक लड़की अनजानी सी ,
शायद जानी पहचानी सी ,
खड़ी थी तपती धूप में ,
किसी के इन्तजार में ,
या फिर छाँव की तलाश में ,
ढूँढ रही थी उसकी आँखे किसी को ,
अजनबी चेहरो में किसी अपने को ,
शायद अपनी माँ को ,
वो बिछुड़ चुकी थी अपनों से ,
बेखबर अनजान सपनो से ,
रोती हुई आँखे मल रही थी ,
और धीरे धीरे सांझ ढल रही थी,
रात के अँधेरे उसे सोने न देते ,
माँ के मीठे बोल उसे रोने न देते ,
वो डरती सहम-ती फिर खुद में खो जाती ,
एक पल उदास तो अगले ही पल खुश हो जाती ,
कभी जानी पहचानी सी आहट उसे अपनी ओर खिंचती ,
तो कभी अनजाने शोर से वो छिपती ,
दुबक कर बैठी गयी थी वो एक कोने में ,
तभी एक ममता भरी पुकार उसके कानो को दस्तक दे गयी ,
अश्रु लिये आँखों में वो अपनी माँ से लिपट गयी ,
लेकर चेहरे पे हैरानी सी और थोड़ी परेशानी सी ,
एक लड़की अनजानी सी ,
शायद जानी पहचानी सी ,
शीतलेश थुल !!

12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 05/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 05/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 05/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 05/08/2016
  3. Kajalsoni 05/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 05/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 05/08/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 06/08/2016

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