मनभावन सावन-रामबली गुप्ता

सावन मनभावन

घेरि-घेरि घनघोर घटा अति स्नेह-सुधा बरसाए जन में।
चमक चंचला हाय! विरही मन की तपन बढ़ाये छन में।।

भीग-भीग हिय गीत प्रीत के गाये सुख पाये सावन में।
झूम-झूम तरु राग वागश्री गाएं हरषाएं जीवन में।।

टर्र-टर्र टर्राएं दादुर अति रति भाव जगा निज मन में।
म्याव-म्याव धुन गाये, नाचे मोर मोरनी के सँग वन में।।

कुहुक-कुहुक कर गाये कोयल हृदय चुराए छिप उपवन में।
सुखमय यह सावन मनभावन अति सुख लाये हर जीवन में।।

रचना-रामबली गुप्ता

9 Comments

  1. mani mani 05/08/2016
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 05/08/2016
  3. babucm babucm 05/08/2016
  4. ALKA ALKA 05/08/2016
  5. अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव 05/08/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/08/2016
  7. Er Anand Sagar Pandey 05/08/2016
  8. Kajalsoni 05/08/2016
  9. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016

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