खुली किताब

जिंदगी खुली किताब है यारों
चाहे जो कोई पढ़ ले
पसंद आ जाये तुमको जो भी
उसको दिल में मढ़ ले।

दो पहिए पर चलती है ये
खुशी.गम की गाड़ी
चित्मन भी ठंठी पड़ जाती
गरम खून की नाड़ी।

चार दिन की जिंदगी में
चाहे जो भी कर ले
जिंदगी खुली किताब है यारों
चाहे तो इसे पढ़ ले।

प्यार से कोई रूठ है जाता
कोई जाता प्यार में लूट
ये धागा कमजोर है इतना
एक झटके में जाता टूट।

ये दुनिया अनजान है इतना
चाहे जितना भी बन ले
जिंदगी खुली किताब है यारों
चाहे तो कोई पढ़ ले।

मानवता का पाठ पढ़ानें
अब कौन यहाॅ पर आयेगा
छल. कपट में रहने वाला
क्या अब पाठ पढ़ायेगा।

बहुत कम इंसान बचे हैं
अपने को तुम गढ़ ले
जिंदगी खुली किताब है यारों
चाहे तो कोई पढ़ ले।

बी पी शर्मा बिन्दु

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

14 Comments

  1. babucm babucm 05/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 05/08/2016
  2. mani mani 05/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 05/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 05/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 05/08/2016
  4. Kajalsoni 05/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 05/08/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 05/08/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 06/08/2016

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