अलविदा !!!

अलविदा !!!
अलविदा
जाते जाते मुझ पर एक एहसान कर जाना ,
वो जो यादें तुम्हारी है साथ लेते जाना…
जख्म जो दिए है तुमने ,
उनके निशान बाकि है आज भी ,
उन जख्मो को भर ना सका मैं,
तुम जाते जाते मरहम देते जाना…
याद आते है वो लम्हे जो बीतें थे कभी साथ में ,
तुम्हे कसम है उन लम्हों की ,
जो जीते है तुम्हारा चेहरा देख कर ,
उन्हें तस्वीर नहीं यादो का एक गुलदस्ता देते जाना…
मगर वो जो यादें तुम्हारी है उसे साथ लेते जाना…
जाते जाते मुझ पर एक एहसान कर जाना…
शीतलेश थुल !!

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 05/08/2016

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